Wednesday, December 25, 2019

CREAMY CHICKEN TIKKA

CREAMY CHICKEN TIKKA
 
INGREDIENTS

500 gms of boneless, skinless chicken cut into 1 inch pieces (I used the thigh portions as they are the most tender for any kebabs)
1 cup whipping cream
Half cup grated cheddar cheese
Juice of one lemon (or two)
1 tablespoon ginger paste
1 tablespoon garlic paste
1 tablespoon green chili paste
Half cup minced coriander leaves
Half teaspoon mace powder
Half teaspoon nutmeg powder
1 teaspoon coriander powder
1 tablespoon black pepper powder
Salt to taste
Vegetable oil for basting (This oil holds more heat and is the best for kebabs)

METHOD

Whip up a marinade with the cream, cheese and spices, except oil in a bowl, add the chicken pieces and mix well. Marinade the chicken for 5-6 hours.
IMG_6264Set oven on Broil and preheat on High. Stick the chicken pieces on skewers and baste them with oil. Arrange them on a baking tray and they are ready to go in the oven. Cook for 15 minutes on each side. Turn the skewers mid-way when they start searing from the edges.
IMG_6266Squeeze some lemon juice and serve piping hot with onion rings. The cream keeps the tikka kebabs moist and the spices load them up very subtly.
IMG_6274IMG_6275

DAAL

DAAL

INGREDIENTS

Split gram chana dal 1/4 cup
Whole green gram (moong) 1/4 cup 
split black gram, skinless (urad dal)..... 1/4 cup 
Pigeon peas, split (toor dal) 1/4 cup 
Red lentils (masoor) 1/4 cup
Salt . . as per taste
Ginger .1 one inch piece
Dried red chillies 2 
Coriander powder I tspn 
Green chillies 2
coriander leaves .2 tblspns 
Cumin powder I tspn
Red chilli powder .......1/2 tspn
Turmeric powder .......1/2 tspn 
Tomatoes .2 medium sized
Oil . 3 tblspns
Cumin seeds 1/2 tspn 
Cloves 4-5
Asafoetida . a pinch 
Garam masala powder 1/2 tspn 

METHOD OF PREPARATION

1.Soak the pulses for at least two hours. Then boil them in salted water with 
turmeric powder till done. Wash green chillies, coriander leaves and peel ginger. 
2 Make a paste of ginger and green chillies. Chop the coriander leaves. Wash and chop the tomatoes. 
3 Heat oil in a pan. Add asafoetida, cumin seeds, cloves and dried red chillics. 
4 When cumin starts to change colour, add ginger-green chilli paste and sauté for sometime. 
5  Addcumin powder, coriander powder and red chilli powder. Add the tomatoes and cook till oil separates. Add cooked lentils and water if required. 
6 Cook for ten minutes, stirring well. Add garam mxsala powder and serve hot. 


SABZI AUR TOMATO KA PULAO

SABZI AUR TOMATO KA PULAO

Basmati rice -------1 1/2 cups
Onions 2 medium sized
ghee 3 tblspns
cumin seeds I tspn
green cardamom 3-4
Large cardamom 3-4
Cinnamon I onc inch stick
Cloves 4-6
Water  3 cups
Tomatoes 3-4
Cauliflower cut into florets ....3/4 cup
Carrots 2 small sized
French beans 10-12
Shelled green peas 1/2 cup
Salt .. as per taste

INGREDIENTS

METHOD OF PREPARATION
1 Wash and soak the rice in water for an hour.
2.Peel and slice onions. Wash and chop tomatoes and keep aside.
3.Peel carrots and dice them into half inch cubes. String beans and cut them
into half inch sized pieces.
4.Heat ghee in a thick-bottomed pan, add cumin seeds, green cardamom,
large cardamom, cinnamon and cloves. Once they start to crackle, add sliced onions and cook till onions become translucent.
5.Add chopped tomatoes and cook till oil can be seen on the sides of the pan.
Add three cups of water and bring to a boil. Add carrots and cook for five minutes.
6.Drain excess water from rice and add rice to the pan. Once it starts to boil,
add green peas, cauliflower florets, diced beans and salt. Reduce the heat
and cover the pan. Cook till rice is completelv done.
7.When the rice is cooked, open the pulao, and lightly stir with a spatula so
as to ensure that no lumps are formed.

MATAR MUSHROOM

MATAR MUSHROOM


INGREDIENTS

Shelled green peas 1 1/2 cups
Mushrooms .200 gms
Oil . .2 tblspns
Green cardamom 4
Cinnamon I one inch stick
Onions . 2 large sized
Ginger paste .1 tblspn
Garlic paste . .1 tblspn
Tomato puree 1/2 cup
Red chilli powder . .1 tblspn
Coriander powder .1 tblspn
Iürmeric powder .1 tblspn
Garam masala powder . .1 tblspn
Salt as per taste
Cashewnut paste ...1/2 cup


METHOD OF PREPARATION 

1 Clean, wash and cut mushrooms in quarters. Peel onions and chop them
finely.
2 Heat oil in a kadai. Add green cardamom, cinnamon stick and chopped onions and sauté until light golden brown.
3 Add ginger paste, garlic paste, and cook for half a minute. Add tomato
puree, red chilli powder, coriander powder, turmeric powder, garam
masala powder and salt and cook till oil leaves the masala.
4 Add cashewnut paste dissolved in one cup of water, stir well. Add a cup of water, bring it to a boil and then add green peas and mushrooms. Cook
on high flame for seven to eight minutes or till green peas are fully cooked.
5 Cook on a low flame for five minutes. Serve hot.

GOBHI MUSSALLAM

GOBHI MUSSALLAM

INGREDIENTS 

Cauliflower (small sized) .2 
Cumin powder . I tspn 
Red chilli powder . I tblspn 
Coriander powder . I tblspn 
Garam masala powder 
Tomato puree 1/2 cup 
Salt .......as per taste 
I tspn 
Turmeric powder 1/2 cup 
Onions 2 medium sized 
Melon seeds 1/2 cup + I tspn 
Oil . .3 tblspns 
Ginger paste I tblspn 
Garlic paste I tblspn 
Mawa (khoyø)1/2 cup 
Fresh cream 1/2 cup 
Chopped coriander leaves ....2 tblspns 


METHOD OF PREPARATION 

1. Remove stalks from cauliflower. Boil cauliflower in salted water with 1/2 tspn turmeric powder till half cooked. Peel onions and grate them. Soak 
1/2 cup melon seeds in water for an hour and grind to a smooth paste. 
2. Heat oil in a kadai. Add grated onions and sauté until golden brown in 
colour. 
3 Add ginger paste, garlic paste, cumin powder, red chilli powder, coriander  
powder, remaining turmeric powder, garam masala powder and salt. Stir 
for half a minute. 
4.Add tomato puree and cook till oil leaves the masala. Add melon seed 
paste dissolved in I cup of water. Bring to a boil. Add mawa. Mix well. 
5.Add half-boiled cauliflower and cook covered on low heat or in a pre-heated 
oven for fifteen minutes. Top with fresh cream and simmer for five minutes 
6.Serve hot, garnished with chopped coriander leaves and melon seeds. 

Chakarviuh of banks




बैंकों का मायाजाल

दिल्ली के मेधावी छात्र, रवी कोहाड़ ने गहन शोध के बाद एक सरल हिन्दी पुस्तक प्रकाशित की है, जिसका शीर्षक है बैंकों का मायाजाल । इस पुस्तक में बड़े रोचक और तार्किक तरीके से यह सिद्ध किया गया है कि दुनिया भर में महंगाई, बेरोजगारी, हिंसा के लिए आधुनिक बैंकिंग प्रणाली ही जिम्मेदार है। इन बैंकों का मायाजाल लगभग हर देश में फैला है। पर उसकी असली बागडोर अमरीका के 13 शीर्ष लोगों के हाथ में हैं और ये शीर्ष लोग भी मात्र 2 परिवारों से हैं। सुनने में यह अटपटा लगेगा, पर यह हिला देने वाली जानकारी हैं, जिसकी पड़ताल जरूरी है।
सीधा सवाल यह है कि भारत के जितने भी लोगों ने अपना पैसा भारतीय या विदेशी बैंकों में जमा कर रखा है, अगर वे कल सुबह इसे मांगने बैंक पहुंच जाएं, तो क्या ये बैंक 10 फीसदी लोगों को भी उनका जमा पैसा लौटा पाएंगे। जवाब हैं नहीं, क्योंकि इस बँकिंग प्रणाली में जब भी सरकार या जनता को कर्ज लेने के लिए पैसे की आवश्यकता पड़ती है तो वे ब्याज समेत लिए पैसे की आवश्यकता पड़ती है, तो वे व्याज समेत पैसा लौटाने का वायदा लिखकर बैंक के पास जाते हैं। बदले में बैंक उतनी ही रकम आपके खातों में लिख देते हैं। इस तरह से देश का 95 फीसदी पैसा व्यावसायिक बैंकों ने खाली खातों में लिखकर पैदा किया है, जो सिर्फ खातों में ही बनता है और लिखा रहता है। भारतीय रिजर्व बैंक मात्र 5 प्रतिशत पैसे ही बनाता है, जो कि कागज के नोट के रूप में हमें दिखाई पड़ते हैं इसलिए बैंकों ने 1933 में गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म कराकर आपके रुपए की ताकत खत्म कर दी। अब आप जिसे रुपया समझते हैं, दरअसल वह एक रुक्का है जिसकी कीमत कागज के ढेर से ज्यादा कुछ भी नहीं। इस रुक्के पर क्या लिखा है, ''मैं धारक को एक हजार रुपए अदा करने का वचन देता हूँ'', यह कहता है भारत का रिजर्व बैंक। जिसकी गारंटी भारत सरकार लेती है। इसलिए आपने देखा होगा कि सिर्फ एक के नोट पर भारत सरकार लिखा होता है और बाकी सभी नोटों पर रिजर्व बैंक लिखा होता है। इस तरह से लगभग सभी पैसा बैंक बनाते हैं। पर रिजर्व बैंक के पास जितना सोना जमा है, उससे कई दर्जन गुणा ज्यादा कागज के नोट छापकर रिजर्व बैंक देश की अर्थव्यवस्था को झूठे वादों पर चला रहा है।
जबकि 1933 से पहले हर नागरिक को इस बात की
तस्सली थी कि जो कागज का नोट उसके हाथ में है, उसे लेकर वह अगर बैंक जाएगा, तो उसे उसी मूल्य का सोना या चांदी मिल जाएगा।कागज के नोटों के प्रचलन से पहले चांदी या सोने के सिक्के चला करते थे। उनका मूल्य उतना ही होता था, जितना उस पर अंकित रहता था यानी कोई जोखिम नहीं था।
अगर बैंक जाएगा, तो उसे उसी मूल्य का सोना या चांदी
मिल जाएगा। कागज के नोटों के प्रचलन से पहले वादी
या सोने के सिक्के चला करते थे। उनका मूल्य उतना
ही होता था, जितना उस पर अंकित रहता था, यानी का
जोखिम नहीं था।
पर, अब आप बैंक में अपना एक लाख रुपया जमा करते हैं, तो बैंक अपने अनुभव के आधार पर उसका मात्र 10 फीसदी रोक कर 90 फीसदी कर्जे पर दे देता हैं और उस पर ब्याज कमाता है। अब जो लोग ये कर्जा लेते हैं, वे भी इसे आगे सामान खरीदने में खर्च कर देते हैं, जो उस बिक्री से कमाता है, वह सारा पैसा फिर बैंक में जमा कर देता है, यानी 90 हजार रुपए बाजार में घूमकर फिर बैंक में ही आ गए। अब फिर बैंक इसका 10 फीसदी रोककर 81 हजार रुपया कर्ज पर दे देता है और उस पर फिर ब्याज कमाता है। फिर वह 81 हजार रुपया बाजार में घूमकर बैंकों में वापस आ जाता है। फिर बैंक उसका 10 फीसदी रोककर बाकी को बाजार में दे देता है और इस तरह से बार-बार कर्ज देकर और हर बार ब्याज कमाकर जल्द ही वह स्थिति आ जाती है कि बैंक आप ही के पैसे का मूल्य चुराकर बिना किसी लागत के 100 गुणी सम्पत्ति अर्जित कर लेता है। इस प्रक्रिया में हमारे रुपए की कीमत लगातार गिर रही है। आप इस भ्रम में रहते हैं कि आपका पैसा बैंक में सुरक्षित है। दरअसल, वह पैसा नहीं, केवल एक वायदा है, जो नोट पर छपा है। पर, उस वायदे के बदले (नोट के) अगर आप जमीन, अनाज, सोना या चांदी मांगना चाहें, तो देश के कुल 10 फीसदी लोगों को ही बँक ये सब दे पाएंगे। 90 फीसदी के आगे हाथ खड़े कर देंगे कि न तो हमारे पास सोना/ चांदी है, न सम्पत्ति है और न ही अनाज, यानी पूरा समाज वायदों पर खेल रहा है और जिसे आप नोट समझते हैं, उसकी कीमत रही से ज्यादा कुछ नहीं है।
यह सारा भ्रमजाल इस तरह फैलाया गया है कि एकाएक कोई अर्थशास्त्री, विद्वान, वकील, पत्रकार, अफसर या नेता आपकी इस बात से सहमत नहीं होगा और आपकी हंसी उड़ाएगा। पर, हकीकत यह है कि बैंकों की इस रहस्यमयी माया को हर देश के हुक्मरान एक खरीदे गुलाम की तरह छिपाकर रखते हैं और बैंकों के इस जाल में एक कठपुतली की तरह भूमिका निभाते हैं। पिछले 70 साल का इतिहास गवाह है कि जिस-जिस राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने बैंकों के इस फरेब का खुलासा करना चाहा या अपनी जनता को कागज के नोट के बदले सम्पत्ति देने का आश्वासन चरितार्थ करना चाहा, उस उस राष्ट्राध्यक्ष की इन अंतर्राष्ट्रीय बैंकों के मालिकों ने हत्या करवा दी। इसमें खुद अमरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन व जॉन.एफ. कैनेडी, जर्मनी का चांसलर हिटलर, ईरान (1953) के राष्ट्रपति, ग्वाटेमाला (1954) के राष्ट्रपति, चिली (1973) के राष्ट्रपति, इक्वाडोर (1981) के राष्ट्रपति, पनामा (2002) के राष्ट्रपति, वैनेजुएला (2002) के राष्ट्रपति, ईराक (2003) के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन, लीबिया (2017) का राष्ट्रपति गद्दाफी शामिल हैं। जिन मुस्लिम देशों में वहां के हुक्मरान पश्चिम की इस बँकिंग व्यवस्था को नहीं चलने देना चाहते, उन-उन देशों में लोकतंत्र बहाली के नाम पर हिंसक आंदोलन चलाए जा रहे हैं, ताकि ऐसे शासक का तख्तापलट कर पश्चिम की इस लहूपिपासु बैंकिंग व्यवस्था को लागू किया जा सके। खुद उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने एक बार कहा था कि अगर अमरीका की जनता को हमारी बैंकिंग व्यवस्था की असलियत पता चल जाए तो कल ही सुबह हमारे यहां क्रांति हो जाएगी।"
जब देशों को रुपए की जरूरत होती हैं, तो ये आई.एम.एफ या विश्व बैंक से भारी कर्जा ले लेते हैं और फिर उसे न चुका पाने की हालत में नोट छाप लेते हैं जबकि इन न छपे नोटों के पीछे सरकार के झूठे वायदों के अलावा कोई ठोस सम्पत्ति नहीं होती। नतीजतन, बाजार में नोट तो आ गए, पर सामान नहीं है, तो महंगाई बढ़ेगी। यानी महंगाई बढ़ाने के लिए किसान या व्यापारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि यह बैकिग व्यवस्था जिम्मेदार है।ये जब चाहें महंगाई बढ़ा लें और जब चाहें उसे रातों-रात घटा लें। सदियों से सभी देशों में वस्त विनिमय होता आया था। आपने अनाज दिया, बदले में मसाला ले लिया। आपने सोना या चांदी दिया बदले में कपड़ा खरीद लिया। मतलब यह कि बाजार में जितना माल उपलब्ध होता था, उतने ही उसके खरीददारों की हैसियत भी होती थी। उनके पास जो पैसा होता था, उसकी ताकत सोने के बराबर होती थी। आज आपके पास करोड़ों रुपया है और उसके बदले में आपको सोना या सम्पत्ति न मिले और केवल कागज के नोटों पर छपा वायदा मिले, तो उस रुपए का क्या महत्व हैं ? यह बड़ा पेचीदा मामला है। बिना इस लघु पुस्तिका को पढे, समझ में नहीं आएगा। पर, अगर यह पढ़ ली जाए, तो एक बड़ी बहस देश में उठ सकती हैं जो लोगों को बैंकिंग के मायाजाल की असलियत जानने पर मजबूर करेगी।

आज से लगभग 300 वर्ष पहले (1694 ई.) यानी बैंक ऑफ इंगलैंड' के गठन से पहले सरकारें मुद्रा का निर्माण करती थीं। चाहे वह सोने-चांदी में हो या अन्य किसी रूप में। इंगलैंड की राजकुमारी मैरी से-1677 में शादी करके विलियम तृतीय 1689 में इंगलैंड का राजा बन गया।
कुछ दिनों बाद उसका फ्रांस से युद्ध हुआ, तो उसने मनी चेंजर्स से 12 लाख पौंड उधार मांगे। उसे 2 शर्तों के साथ ब्याज देना था, मूल वापस नहीं करना था- (1) मनी चेंजर्स को इंगलैंड के पैसे छापने के लिए एक केन्द्रीय बैंक ‘बैंक ऑफ इंगलैंड' की स्थापना की अनुमति देनी होगी। (2) सरकार खुद पैसे नहीं छापेगी और बैंक सरकार को भी 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से कर्ज देगा। जिसे चुकाने के लिए सरकार जनता पर टैक्स लगाएगी।
इस प्रणाली की स्थापना से पहले दुनिया के देशों
में जनता पर लगने वाले कर की दरें बहुत कम होती
थीं और लोग सुख-चैन से जीवन बसर करते थे। पर
इस समझौते के लागू होने के बाद पूरी स्थिति बदल
गई। अब मुद्रा का निर्माण सरकार के हाथों से छिनकर
निजी लोगों के हाथ में चला गया यानी महाजन (बैंकर) के हाथ में चला गया। जिनके दबाव में सरकार को लगातार करों की दरें बढ़ाते जाना पड़ा। जब भी सरकार को पैसे की जरूरत पड़ती थी, वे इन केन्द्रीयकृत बैंकों के पास जाते और ये बैंक जरूरत के मुताबिक पैसे का निर्माण कर सरकार को सौंप देते थे। मजे की बात यह थी कि पैसा निर्माण करने के पीछे इनकी कोई लागत नहीं लगती थी। ये अपना जोखिम भी नहीं उठाते थे। बस मुद्रा बनाई और सरकार को सौंप दी। इन बैंकर्स ने इस तरह इंगलैंड की अर्थव्यवस्था को अपने शिकंजे में लेने के बाद अपने पांव अमरीका की तरफ पसारने शुरू किए।
उस समय अमरीका के प्रांतों की सरकारें अपनी-अपनी मुद्राएं बनाती थीं परंतु इन बैंकरों ने इंगलैंड के राजा जॉर्ज द्वितीय पर दबाव डालकर इंगलैंड के उपनिवेश अमरीका पर दबाव डाला कि वहां की प्रांतीय सरकारें अपनी मुद्राएं न बनाएं और उन्हें जितना रुपया चाहिए, वे बैंकों से कर्ज के रूप में लें। इस शोषक व्यवस्था की स्थापना से अमरीका में तरक्की का रास्ता रुक गया। प्रजा में अशांति हो गई और अमरीका के लोगों ने अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई छेड़ दी और 1776 में अमरीका आजाद हो गया।
आजादी के बावजूद इन बैंकरों ने हार नहीं मानी और नए हथकंडे अपनाकर अमरीका में एक के बाद एक दो केन्द्रीय बैंकों की स्थापना में सफलता हासिल कर ली और अपनी मुद्रा छापकर उसे अमरीका में वैध मुद्रा के रूप में स्थापित कर दिया। इस व्यवस्था के दुष्परिणामों को देखते हुए अमरीका के राष्ट्रपति एन्ड्रयू जैक्सन ने इस केन्द्रीयकृत बैंकिंग व्यवस्था को बंद करने की घोषणा कर दी और केन्द्रीय बैंक बंद हो गया लेकिन अपने जमा सोने के आधार पर प्रांतों के बैंक थोड़ा-थोड़ा पैसा जरूरत के हिसाब से बनाते रहे और अपने राज्यों में चलाते रहे। 1863 में जब अमरीका में गृह युद्ध छिड़ा, तो अमरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को पैसे की जरूरत पड़ी और वह इन बैंकरों से पैसा मांगने गए, तो इन्होंने बहुत ज्यादा ब्याज दर की मांग की जिसको देने पर अब्राहम लिंकन राजी नहीं थे। उन्होंने अपने सचिव के सुझाव पर स्वयं ही मुद्रा छापने का निर्णय लिया। और युद्ध जीत लिया। उनकी इस कामयाबी से तिलमिलाए बैंकरों ने 1865 में अब्राहम लिंकन की हत्या करवा दी। कुछ वर्षों तक अशांति रही और इस मामले में कोई स्पष्ट नीति नहीं आई। पर 1907 तक इन बैंकरों ने एक अफवाह फैलाकर अमरीका के छोटे बैंकों को असफल करवा दिया और समाधान के रूप में एक केन्द्रीय बैंक की स्थापना की मांग की, जो 1913 में 'फैडरल रिजर्व' के नाम से स्थापित हो गया। इस तरह इंगलैंड और अमरीका पर कब्जा कर लेने के बाद इन लोगों ने पिछले 100 वर्ष में धीरे-धीरे दुनिया के सभी देशों में इसी तरह के केन्द्रीय रिजर्व बैंक की स्थापना करवा दी और उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर परोक्ष रूप से अपना कब्जा जमा लिया।
इसी क्रम में 1934 में इन्होंने ' भारतीय रिजर्व बैंक
की स्थापना करवाई। शुरू में भारत का रिजर्व बैंक निजी हाथों में था, पर 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण हो गया।
1947 में भारत का राजनीतिक आजादी तो मिल गई,
लेकिन आर्थिक गुलामी इन्हीं बैंकरों के हाथ में रही ।क्योंकि इन बैंकरों ने ‘बैंक ऑफ इंटरनैशनल सैटलमैंट’
बनाकर सारी दुनिया के केन्द्रीय बैंकों पर कब्जा कर रखा हैं और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था वहीं से नियंत्रित कर रहे हैं। रिजर्व बैंक बनने के बावजूद देश का 95 फीसदी पैसा आज भी निजी बैंक बनाते हैं। वह इस तरह कि जब भी कोई सरकार, व्यक्ति, जनता या उद्योगपति उनसे कर्ज लेने जाता है, तो वे कोई नोटों की गड्डियां या सोने की अशर्फियां नहीं देते, बल्कि कर्जदार के खाते में कर्ज की मात्रा लिख देते हैं।
इस तरह इन्होंने हम सबके खातों में कर्जे की रकमें
लिखकर पूरे देश की जनता को और सरकार को टोपी
पहना रखी है। इस काल्पनिक पैसे से भारी मांग पैदा हो
गई है जबकि उसकी आपूर्ति के लिए न तो इन बैंकों के पास सोना है, न ही सम्पत्ति और न ही कागज के छपे नोट। क्योंकि नोट छापने का काम रिजर्व बैंक करता है और वह भी केवल 5 फीसदी तक नोट छापता है, यानी सारा कारोबार छलावे पर चल रहा है।
इस खूनी व्यवस्था का दुष्परिणाम यह है कि रात-दिन खेतों, कारखानों में मजदूरी करने वाले किसान मजदूर हों, अन्य व्यवसायों में लगे लोग या व्यापारी और उद्योगपति । सब इस मकड़जाल में फंसकर रात-दिन मेहनत कर रहे हैं, उत्पादन कर रहे हैं और उस पैसे का ब्याज दे रहे हैं, जो पैसा इन बैंकों के पास कभी था ही नहीं। यानी हमारे राष्ट्रीय उत्पादन को एक झूठे वायदे के आधार पर ये बँकर अपनी तिजोरियों में भर रहे हैं और देश की जनता और केन्द्र व राज्य सरकारें कंगाल हो रही हैं। सरकारें कर्जे पर डूब रही हैं। गरीब आत्महत्या कर रहा है। महंगाई बढ़ रही है। और विकास की गति धीमी पड़ी है। हमें गलतफहमी यह है कि भारत का रिजर्व बैंक भारत सरकार के नियंत्रण में है।

बैंकों के मायाजाल पर जो दो तथ्यपरक लेख हफ्तों में हमने लिखे, उन पर देशभर से जितनी प्रतिक्रियाएं आई हैं, उतनी आज तक किसी लेख पर नहीं आई। हर पाठक अब इस समस्या का समाधान पूछ रहा है। इसलिए इस कड़ी का यह तीसरा और अंतिम लेख समाधान के तौर पर है। ऐसा समाधान जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बने और हर भारतीय कर्जे के दबाव से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन जी सके। इसके लिए जरूरी होगा कि भारत सरकार देश का पैसा खुद बनाए और इन व्यवसायिक बैंकों को देश लूटने की छूट न दे। इसे हम विस्तार से आगे समझाएंगे।
पहले देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर एक नजर
डाल लें। 2015-16 वित्तीय वर्ष के लिए जो बजट सरकार ने बनाया, उसमें 14,49,490 करोड़ रुपए एकत्रित किए। इसमें से 5,23,958 करोड़ रुपए राज्यों को उनके हिस्से के रूप में दे दिए। इस प्रकार जो बचा उसमें सरकार ने अपनी आमदनी 2,21,733 करोड़ रुपए जोड़ ली और उसकी कुल आय हो गई 11,41,575 करोड़ रुपए। इस आय में से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, विद्युत, संचार, परिवहन, विज्ञान व प्रौद्योगिकी जैसे जनकल्याण कार्यों में मात्र 58,127 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया जबकि इसमें से 6,81,719 करोड़ रुपया बैंकों को ब्याज और किस्त के रूप में दे दिया। अब आप स्वयं ही देख लीजिए कि भारत सरकार अपने हिस्से के बजट का 60 फीसदी केवल बैंकों को दे देती है फिर क्या खाक विकास होगा और हम कभी इस कर्जे के मकड़जाल से मुक्त नहीं हो पाएंगे। आप चाहे जितनी मेहनत कर लो, कितना उत्पादन कर लो, कितना भी कर दे दो सरकार को, सबका सब ये बैंक हजम कर जाते हैं, तो कैसे होगा आपका विकास?
शोध से यह परिणाम निकलकर आ रहा है कि लगभग 25 लाख करोड़ रुपया सालाना भारत का सरकार, राज्य सरकारों और जनता को लूटकर ये बैंक ले जा रहे हैं और अपनी तिजौरियां भर रहे हैं। इस तरह हमारे रुपए की कीमत लगातार तेजी से गिरती जा रही है। इस व्यवस्था के पहले अगर हमारे पास 100 रुपए होते थे तो उसका मतलब था 100 तोला यानी 1 किलो चांदी। पर आज अगर हमारे पास 100 रुपए हैं तो उसकी कीमत रह गई मात्र 25 पैसे। 99.75 रुपए इस बैंकिंग व्यवस्था ने डकार लिए और हमें व हमारे देश को कंगाल कर दिया केवल खातों में कर्जे दिखाकर।
समाधान के रूप में हमें अपनी इस पिरामिड वाली बैंकिंग व्यवस्था को पलटना होगा। इंगलैंड के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति और बैंक ऑफ इंगलैंड के डायरैक्टर सर जोशिया स्टाम्प ने टैक्सास विश्वविद्यालय में 1927
को भाषण देते हुए कहा था कि 'आधुनिक बैंकिंग प्रणाली जादुई तरीके से पैसा बनाती है। यह प्रक्रिया
शायद जादू का अभी तक का सबसे बड़ा आविष्कार
है। बैंकिंग की कल्पना में अन्याय हैं और यह पाप से
जन्मा है। बैंकर पृथ्वी के मालिक हैं। अगर इसे तुम उनसे छीन भी लो, पर उन्हें पैसे बनाने की शक्ति देकर रखो, तो वे कलम के एक झटके के साथ, सारी धरती को फिर से खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे बना लेंगे।
उनसे यह भारी ताकत छीन लो तो फिर यह दुनिया ज्यादा खुशहाल और रहने के लिए एक बेहतर जगह होगी। परन्तु अगर आप बैंकरों के गुलाम बने रहना चाहते हो और अपनी खुद की ही गुलामी की लागत का भुगतान देना जारी रखना चाहते हो तो बैंकों को पैसे बनाने और उसे नियंत्रित करने की शक्ति उन्हीं के पास रहने दो।''
अगर भारत सरकार अपना पैसा खुद बनाए तो उसे
ब्याज देने की जरूरत नहीं होगी। आज की व्यवस्था के
अनुसार कुल बजट का 40 फीसदी ही सरकार खर्च पर
पाती है, शेष 60 प्रतिशत कर्जे के भुगतान में चला जाता है। अगले आर्थिक वर्ष से अगर सरकार से 40 फीसदी पैसा खुद बना लें तो पुराना कर्ज तो चुकाती रहे, पर नया कर्ज उस पर कुछ नहीं चढ़ेगा और जब नया कर्ज नहीं चढ़ेगा, तो उसे कर बढ़ाने की भी आवश्यकता नहीं होगी और इसके तुरन्त प्रभाव से सरकार का बजट 3 गुना बढ़ जाएगा। ऐसा करने से सरकार अपनी आवश्यकता का पैसा खुद बना लेगी और उसे विकास योजनाओं के लिए कोई कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। धीरे-धीरे पुराना कर्ज खत्म हो जाएगा और कुछ ही वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत हो जाएगी कि उसका अपना बजट चीन के बजट से भी ज्यादा हो जाएगा और तब भारत दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में पहले नम्बर पर पहुंच जाएगा, जैसा सन् 1700 में था।
दरअसल यह कोई अजीब बात नहीं है। 1969 में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण
करके इस ओर एक मजबूत कदम बढाया था जिससे
बैंकिंग उद्योग में खलबली मच गई और तत्कालीन
अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा
सलाहकार हैनरी किंसिजर ने इंदिरा गांधी को और
भारतीयों को भद्दी गालियां दीं और भारत पर पाकिस्तान से हमला करवाकर हमें जबरदस्ती युद्ध में धकेल दिया।
1971 में की गई उनकी यह निजी बातचीत अमरीकी
सरकार के दस्तावेजों के 2005 में सार्वजनिक होने पर
प्रकाश में आई । यह बात दूसरी है कि भारत ने पाकिस्तान को 1971 के युद्ध में हरा दिया। इस तरह इंदिरा गांधी ने देश को बैंकरों के शिकंजे से छुड़ाने में एक मजबूत और सफल कदम बढ़ाया। यह बात आगे जाती उससे पहले ही इंदिरा गांधी स्वयं भ्रष्टाचार में फंस गईं। जिसकी आड़ में बैंकिंग समुदाय ने उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंका। बाद की सरकारों ने बैंकों को फिर से
निजी हाथों में देना शुरू कर दिया। और हम फिर उनके मायाजाल में फंस गए।
अब अगर प्रधानमंत्री पैसा खुद बनाने का छोटा, लेकिन कड़ा निर्णय लेते हैं तो जनता और व्यापारी वर्ग को कर और कर्ज से मुक्त कर सकते हैं, देश को कर्जमुक्त कर सकते हैं और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं। तब देश को कभी भी महंगाई और मंदी का मुंह नहीं देखना पड़ेगा और तब फिर से बनेगा भारत सोने की चिड़िया।


Vineet Narain


ਬੱਟਰ ਚਿਕਨ

ਬਟਰ ਚਿਕਨ

ਜ਼ਰੂਰੀ ਸਾਮਾਨ

ਡੇਢ ਕੱਪ ਦਹੀਂ
ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਚਿਕਨ ਥਾਈਜ਼
ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਚਮਚ ਨਿੰਬੂ ਦਾ ਰਸ
ਇੱਕ ਚਮਚ ਹਲਦੀ
ਡੇਢ ਚਮਚ ਗਰਮ ਮਸਾਲਾ
ਡੇਢ ਚਮਚ ਜੀਰਾ ਭੁੰਨਿਆ ਹੋਇਆ ਅਤੇ ਪੀਸਿਆ ਹੋਇਆ ਇੱਕ ਚਮਚ ਪੀਸੀ ਹੋਈ ਕਸੂਰੀ ਮੇਥੀ
ਅੱਧਾ ਕੱਪ ਮੱਖਣ ਬਿਨਾਂ ਨਮਕ ਵਾਲਾ
ਦੋ ਕੱਪ ਪਿਆਜ਼ ਦਾ ਪੇਸਟ
ਇੱਕ ਕੱਪ ਟਮਾਟਰ ਪੇਸਟ ਪਿਓਰੀ
ਦੋ ਵੱਡੇ ਚਮਚ ਅਦਰਕ ਲਸਣ ਪੇਸਟ
ਇਕ ਕੱਪ ਕ੍ਰੀਮ
ਤਿੰਨ ਕੱਪ ਚਿਕਨ ਸਟਾਕ
ਇੱਕ ਚਮਚ ਜ਼ੀਰਾ
ਇਕ ਟੁਕੜਾ ਦਾਲਚੀਨੀ ਓਖਲੀ ਵਿੱਚ ਕੁਟੀ ਹੋਈ
ਸਵਾਦ ਅਨੁਸਾਰ ਲਾਲ ਮਿਰਚ ਪਾਊਡਰ
ਸਵਾਦ ਅਨੁਸਾਰ ਨਮਕ
ਹਰਾ ਧਨੀਆਂ
ਤੇਲ

ਸਜਾਵਟ ਦੇ ਲਈ
ਬਟਰ ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਬਰੀਕ ਕੱਟੇ ਹੋਏ ਹਰੇ ਧਨੀਆਂ ਪੱਤੀਆਂ ਅਤੇ ਕਰੀਮ ਨਾਲ ਸਜਾਓ

ਵਿਧੀ

1.ਇੱਕ ਬਰਤਨ ਵਿੱਚ ਦਹੀਂ, ਨਿੰਬੂ ਦਾ ਰਸ, ਹਲਦੀ, ਗਰਮ ਮਸਾਲਾ ਪਾਊਡਰ ਅਤੇ ਪੀਸਿਆ ਹੋਇਆ ਭੁੰਨਿਆ ਜੀਰਾ ਪਾਓ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਸਾਮਾਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਫ਼ੈਟਦੇ ਹੋਏ ਮਿਕਸ ਕਰ ਲਓ।

2.ਹੁਣ ਦਹੀਂ ਮਿਸ਼ਰਣ ਵਿੱਚ ਚਿਕਨ ਥਾਈਜ਼ ਪਾ ਕੇ ਇੱਕ ਚਮਚ ਨਾਲ ਮਿਲਾਓ , ਫਿਰ ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਮੈਰੀਨੇਟ ਕਰਨ ਲਈ ਫਰਿੱਜ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਦਿਨ ਤੱਕ ਰੱਖੋ।

3.ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਗੈਸ ਤੇ ਇੱਕ ਪੈਨ ਵਿਚ ਤੇਲ ਗਰਮ ਕਰੋ, ਫਿਰ ਮੱਧਮ ਆਂਚ ਤੇ ਗਰਮ ਤੇਲ ਵਿੱਚ ਮੱਖਣ ਪਾ ਕੇ ਪਿਘਲਾਓ , ਇਸਦੇ ਬਾਅਦ ਮੱਖਣ ਵਿੱਚ ਜੀਰਾ ਅਤੇ ਦਾਲਚੀਨੀ ਪਾ ਕੇ ਭੁੰਨੋ, ਜਿਵੇਂ ਹੀ ਜੀਰਾ ਚਟਕਣ ਲਗੇ ਤਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਪਿਆਜ਼ ਪਾ ਕੇ ਫ੍ਰਾਈ ਕਰ ਲਓ।

4.ਜਦ ਪਿਆਜ਼ ਹਲਕਾ ਸੁਨਹਿਰਾ ਹੋ ਜਾਵੇ ਹੋ ਜੋ ਉਸ ਵਿੱਚ ਅਦਰਕ ਲਸਣ ਪੇਸਟ ਪਾ ਕੇ ਭੁੰਨੋ।

5.ਹੁਣ ਗਰੇਵੀ ਵਿੱਚ ਟਮਾਟਰ ਪੇਸਟ ਪਿਓਰੀ, ਕਰੀਮ, ਲਾਲ ਮਿਰਚ ਅਤੇ ਨਮਕ ਪਾ ਕੇ ਪੰਜ ਮਿੰਟ ਤੱਕ ਮੀਡੀਆਂ ਆਂਚ ਤੇ ਪਕਾਓ।

6.ਜਦ ਗਰੇਵੀ ਵਿੱਚ ਤੇਲ ਅਲੱਗ ਹੁੰਦਾ ਨਜ਼ਰ ਆਵੇ ਉਦੋਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਮੈਰੀਨੇਟ ਕੀਤੇ ਹੋਏ ਚਿਕਨ ਥਾਈਜ਼ ਪਾ ਕੇ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਚਮਚ ਨਾਲ ਚਲਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਦੋ ਮਿੰਟ ਤੱਕ ਮਿਕਸ ਕਰੋ।

7.ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਚਿਕਨ ਵਿੱਚ ਚਿਕਨ ਸਟਾਕ ਪਾਓ, ਇੱਕ ਉਬਾਲ ਆਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਆਂਚ ਹੌਲੀ ਕਰ ਦਓ ਤੇ ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਪੰਦਰਾਂ ਤੋਂ ਵੀਹ ਮਿੰਟ ਤੱਕ ਬਿਨਾਂ ਢੱਕੇ ਪੱਕਣ ਦਓ , ਵਿੱਚ ਵਿੱਚ ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਵੱਡੇ ਚਮਚ ਨਾਲ ਹਿਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ।

8.ਚਿਕਨ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੱਕ ਜਾਵੇ ਉਦੋਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਕਸੂਰੀ ਮੇਥੀ ਮਿਲਾਓ ਅਤੇ ਫਿਰ ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਦੋ ਮਿੰਟ ਤੱਕ ਹੋਰ ਪਕਾ ਕੇ ਗੈਸ ਬੰਦ ਕਰ ਦਓ।

9.ਬਟਰ ਚਿਕਨ ਤਿਆਰ ਹੈ , ਹੁਣ ਬਿਨਾਂ ਦੇਰੀ ਕੀਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਖਾਣ ਦੀ ਥਾਲੀ ਵਿੱਚ ਸਰਵ ਕਰੋ।

ਮਸਾਲਾ ਚਿਕਨ ਫ੍ਰਾਈ



ਜ਼ਰੂਰੀ ਸਾਮਾਨ

ਅੱਠ ਦੱਸ ਚਿਕਨ ਪੀਸ
ਇੱਕ ਪਿਆਜ ਸਲਾਈਸ ਕੱਟਿਆ ਹੋਇਆ
ਪੰਜ ਛੇ ਕਲੀਆਂ ਲਸਣ ਕੱਦੂਕਸ ਕੀਤੀ ਹੋਈਆਂ
ਪੰਜ ਹਰੀ ਮਿਰਚ ਕੱਟੀ ਹੋਈ ਬਰੀਕ
ਦੋ ਨਿੰਬੂ ਰਸ
ਇੱਕ ਟਮਾਟਰ ਗੋਲ ਅਕਾਰ ਵਿੱਚ ਕੱਟਿਆ ਹੋਇਆ
ਦੋ ਕੱਪ ਬੇਸਨ
ਇਕ ਛੋਟਾ ਚਮਚ ਲਾਲ ਮਿਰਚ ਪਾਊਡਰ
ਇਕ ਛੋਟਾ ਚਮਚ ਜੀਰਾ ਪਾਊਡਰ
ਦੋ ਚਮਚ ਹਰਾ ਧਨੀਆਂ ਕੱਟਿਆ ਹੋਇਆ
ਪੰਜ ਕਰੀ ਪੱਤਾ
ਚਾਰ ਚਮਚ ਤੇਲ
ਨਮਕ ਸਵਾਦ ਅਨੁਸਾਰ

ਵਿਧੀ

1.ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਚਿਕਨ ਪੀਸ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਸਲਾਈ ਦਾ ਕਾਂਟੇ ਵਾਲੇ ਚਮਚ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਸੁਰਾਖ ਕਰ ਲਓ,ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਮਸਾਲਾ ਚਲਾ ਜਾਵੇ।
2.ਹੁਣ ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਨਮਕ, ਲਾਲ ਮਿਰਚ ਪਾਊਡਰ ਅਤੇ ਨਿੰਬੂ ਦੇ ਰਸ ਨਾਲ ਮੈਰੀਨੇਟ ਕਰੋ ਤੇ ਫਰਿਜ਼ ਵਿੱਚ ਤਕਰੀਬਨ ਇੱਕ ਘੰਟੇ ਲਈ ਰੱਖ ਦਓ।
3.ਇੱਕ ਬਾਉਲ ਵਿੱਚ ਬੇਸਨ, ਹਰੀ ਮਿਰਚ, ਪਿਆਜ਼, ਲਸਣ, ਕੜੀ ਪੱਤਾ, ਹਰਾ ਧਨੀਆਂ ਅਤੇ ਜੀਰਾ ਪਾਊਡਰ ਪਾਓ ਫਿਰ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪੇਸਟ ਬਣਾ ਲਓ।
4.ਇਸ ਵਿੱਚ ਚਿਕਨ ਪੀਸ ਪਾ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਲਪੇਟ ਲਓ ।
5.ਹੁਣ ਇੱਕ ਪੈਨ ਵਿਚ ਤੇਲ ਪਾ ਕੇ ਮੀਡੀਅਮ ਆਂਚ ਤੇ ਰੱਖੋ, ਜਦ ਤੇਲ ਬਿਲਕੁਲ ਗਰਮ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਚ ਚਿਕਨ ਪੀਸ ਨੂੰ ਫ੍ਰਾਈ ਕਰੋ।
6.ਚਿਕਨ ਨੂੰ ਦਸ ਪੰਦਰਾਂ ਮਿੰਟ ਹੋਲੀ ਆਂਚ ਤੇ ਪਕਾਓ।
7.ਲਓ ਜੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਫਰਾਇਡ ਚਿਕਨ, ਇਸ ਨੂੰ ਪਿਆਜ਼ ਤੇ ਟਮਾਟਰ ਨਾਲ ਸਰਵ ਕਰੋ।